केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना MGNREGA का नाम बदलने का बड़ा फैसला ले लिया है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलकर अब “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना” रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
क्या है यह बड़ा बदलाव ?
मनरेगा का मूल नाम नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट था, जिसे बाद में महात्मा गांधी के नाम पर बदला गया। अब सरकार ने इसे एक नए रूप और नए उद्देश्य के साथ “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना” नाम देने का निर्णय लिया है। ‘पूज्य बापू’ नाम महात्मा गांधी के ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता के विचारों को समर्पित है।
125 दिनों की रोजगार गारंटी
नए प्रस्ताव में एक और अहम बदलाव किया गया है—
✔️ रोजगार गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण मजदूरों की सालाना आय में करीब 25% तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
क्या है MGNREGA?
2005 में शुरू हुई यह योजना ग्रामीण भारत में बेरोजगारी कम करने के उद्देश्य से लाई गई थी। इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाता था।
मनरेगा के तहत ग्रामीण मजदूरों को सड़क निर्माण, तालाब-नहर कार्य, जल संरक्षण, वनरोपण और अन्य विकास कार्यों में रोजगार मिलता है।
कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना ने लाखों प्रवासी मजदूरों को घर लौटने के बाद काम उपलब्ध कराकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि नाम बदलने और सुधारों का लक्ष्य—
योजना को नई पहचान देना
ग्रामीण मजदूरों की आमदनी बढ़ान
रोजगार के अवसरों का विस्तार
महात्मा गांधी के ग्रामीण विकास मॉडल को मजबूत करना
